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केरल में साम्राज्यवादी आतंकवादियों को जनता की अदालत के कटघरे में खड़ा किया गया

by Jayarajan C N

सांस्कृतिक मंच केरल द्वारा आयोजित “युद्ध अपराधियों का मुकदमा” कार्यक्रम ने व्यापक जनता का ध्यान आकर्षित किया। यह आयोजन विश्व इतिहास की उस कठोर सच्चाई की याद दिलाता है, जिसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में साम्राज्यवादी अमेरिका और उसके अनुगत आतंकवादी जियोनवादी युद्धअपराधी इज़राइल द्वारा संचालित असंख्य
सैन्य अभियानों और आक्रमणों के कारण लाखों लोगों का जनसंहार हुआ है।


“जन न्यायालय” ने ऐसे समय में युद्ध अपराधी ट्रंप और नेतन्याहू को निशाना बनाया, जब एकतरफा सैन्य आक्रामकता—विशेषकर ईरान जैसे संप्रभु देश के खिलाफ—वैश्विक संघर्ष में बदलने का खतरा पैदा कर रही है, जो आम लोगों के बुनियादी जीवन-यापन को भी प्रभावित कर सकती है (जिसे प्रतीकात्मक रूप से “केरल की रसोईयों के बंद होने” के रूप में व्यक्त किया गया)।

 

कार्यक्रम की शुरुआत त्रिशूर साहित्य अकादमी परिसर से जुलूस के रूप में हुई और इसका समापन नगर निगम कार्यालय के सामने हुआ।पर्यावरण एवं नागरिक अधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता पी.ए. पौरन ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
सांस्कृतिक मंच के राज्य अध्यक्ष वी.ए. बालकृष्णन ने अध्यक्षता की।डॉ. आशा प्रभाकर ने आरोप पत्र प्रस्तुत किया और अमेरिकी साम्राज्यवाद तथा ज़ायनिस्ट इसराइली जनसंहारों के खिलाफ वक्तव्य रखा।
पी.एन. प्रोविंट, कवि आगा, मणिकंदन मूककुथला, प्रदीप कुमार पी.पी. तथा कवि जयप्रकाश ओलारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।वेणुगोपालन कुनियिल और के.टी. गोविंदन ने जुलूस का नेतृत्व किया।

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