शहीदे आजम भगत सिंह ने जेल से ‘नौजवान कार्यकर्ताओं के नाम‘ लिखे पत्र में कहा, क्रांति से हमारा आशय स्पष्ट है। जनता के लिए जनता की राजनीतिक शक्ति हासिल करना। वास्तव में यही है ‘क्रांति‘ बाकी सभी विद्रोह सिर्फ मालिकों के परिवर्तन द्वारा पूंजीवादी सड़ांध को ही आगे बढ़ाते हैं। किसी भी हद तक लोगों से या उनके उद्देश्यों से जताई हमदर्दी जनता से वास्तविकता नहीं छिपा सकती, लोग छल को पहचानते हैं। भारत में हम भारतीय श्रमिक के शासन से कम कुछ नहीं चाहते। भारतीय श्रमिकों को भारत में साम्राज्यवादियों और उनके मददगारों को हटाकर जो कि उसी व्यवस्था के पैरोकार हैं, जिसकी जड़े शोषण पर आधारित हैं- आगे आना है। हम गोरी बुराई की जगह काली बुराई को लाकर कष्ट नहीं उठाना चाहते।‘‘ शहीद भगत सिंह ने स्पष्ट भाषा में बताया था कि- ‘‘क्रांति से हमारा प्रयोजन यह है कि अन्याय पर आधारित वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तन करना।‘‘ इसलिए आज वक्त की नजाकत है कि विद्यार्थी, युवा समुदाय शहीद भगत सिंह के पथ पर चलें। व्यवस्था के साथ चलने वाली राजनैतिक पार्टियाँ और उनके समर्थक अंग के रूप में कार्यरत युवा संगठन इन बुनियादी सवालों पर नौजवानों को दिशा नहीं दे सकते क्योंकि इन राजनैतिक दल और उनके युवा संगठनों ने उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण और संघी मनुवादी फासीवादी ताकतों के आगे घुटने टेक दिया है। फासीवादी सांप्रदायिक, जातिवादी संगठन युवाओं को सांप्रदायिक जातिवादी आधार पर बांट रहे हैं। आज जरूरत इस बात की है कि युवाओं के सामने जो विशिष्ट समस्याएं हैं उनका वैज्ञानिक ढंग से समाधान करना और एक संघर्षशील साम्राज्यवाद विरोधी, कॉर्पोरेट भगवा फासीवाद विरोधी, प्रगतिशील युवा आंदोलन के झंडे तले नौजवानों को संगठित करना।
